Jitendra Narayan Singh became Wasim Rizvi, disappointed and said this thing as the abbot and Taundacharya cool.
ऐसी ही गलती का दंड अब हम हिंदू भोग रहे हैं वरना कश्मीर में आज सभी हिंदू होते।

अपने को अकेला महसूस कर रहे हैं

सनातन 🚩समाचार🌎 शिया मुस्लिम बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सनातन धर्म अपना कर अपना नाम जितेंद्र त्यागी रख लिया था, परंतु उन्हें हिन्दू धर्म में आकर क्या मिला ? इसका उत्तर शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों, तौंदाचार्यों और अखाड़ों को अवश्य देना चाहिए। वसीम रिजवी कुरान पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में जेल काट रहे हैं, साथ ही वो सर तन से जुदा गैंग के भी निशाने पर हैं। कोई भी मठाधीश उनकी सुध नहीं ले रहा है। लगता है की उनका परिवार भी बर्बादी की गर्द में छिप जाएगा और फिर कोई सनातन धर्म में वापस आने का विचार मन में नहीं लाएगा।

मजहब त्याग कर धर्म अपना लिया परंतु साथ कोई नहीं

बतादें की बीमारी के कारण तीन महीने इलाज करवा कर वसीम रिजवी जेल लौटे तो काफी उदास थे। एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में उन्होंने अपना दर्द बताते हुए स्वीकार किया कि सबने किनारा कर उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। बेहद मायूस जितेंद्र त्यागी ने आत्महत्या तक की इच्छा जताई। उनकी बिखर रही मानसिकता यदि उन्हें एक बार फिर इस्लाम में वापस ले जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। फिर बड़े बड़े अखाड़े, सैकड़ों आश्रम और अनेक तौंदाचर्य किस काम के ? अध्यात्म की इस भूमि पर वसीम रिजवी अकेले नहीं, जो धर्म बदलकर उपेक्षा का यह दंश भोग रहे हैं।

कोई भी संस्था या संगठन आगे नहीं आया

शांति प्रसाद आर्य और उनके परिवार ने साठ साल पहले आर्यसमाज जाकर हिन्दू धर्म अपनाया था, किसी हिंदू ने सुध न ली, आज उनके पूरा परिवार घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहा है। वसीम रिज़वी/जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी जी के साथ न तो आरएसएस आया, न विश्व हिंदू परिषद, न बजरंग दल और न ही कोई कथित हिन्दू सेना। देश का कोई धर्माचार्य उन्हें समाहित नहीं कर पा रहा है। सर्वे भवन्तु सुखिनः के जयघोष करने वाले बड़े बड़े संत उन्हें अपने आश्रम में बुलाकर किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते।

शियाओं को अधूरा मुसलमान माना जाता है

बताने की आवश्यकता नहीं है की वसीम रिजवी जब तक मुसलमान थे तब तक तो सब सही था परंतु ज्यों ही वह मुसलमान से हिंदू बने तभी से उन पर मुसीबतों का कहर चालू हो चुका है। यद्यपि वे शिया हैं और मुस्लिम जगत में शियाओं को अधूरा मुसलमान माना जाता है। जिस मजहब में उनका जन्म हुआ उसकी सबसे पवित्र किताब पर टिप्पणी करने की उन्हें कोई जरूरत नहीं थी, परंतु उन्होंने वह सब बोला और उन्हें सनातन धर्म अच्छा लगा तो उन्होंने सनातन धर्म अपना भी लिया।

बोले वसीम/ जितेंद्र नारायण

हिन्दुस्थान में धर्म परिवर्तन एक ऐच्छिक विषय है। प्रलोभन देकर धर्म बदलवाना अपराध है, स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन संविधान सम्मत है। हाल ही में आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत ने कहा था कि भारत के मुसलमानों का डीएनए एक जैसा है। पर उनकी बात मानकर यदि कोई मुस्लिम, हिन्दू धर्म में वापस आए तो क्या संघ परिवार उसके साथ खड़ा होगा ?

जो होना था वह हो चुका परंतु अब हम सारे हिंदू समाज और संत समाज का दायित्व है कि हम रिजवी को अपनाएं। इनके साथ भी वही गलती ना दोहराई जाए जो कभी हम कश्मीर में कर चुके हैं।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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