Government occupation of temples, 50,000 darshan conspiracy to remove Hindus from religion / temples.”

भंडारे लगाने पे लगान, तीर्थ यात्रा पे जजिया, मंदिरों का चढ़ावा सरकार लेकर हिंदुओं के लिए क्या करती है ? ?

पवित्र तीर्थ

सनातन 🚩समाचार🌎 मंदिर हिंदुओं के, भगवान हिंदुओं के, श्रद्धा हिंदुओं की, पैसा हिंदुओं का और मंदिरों पे कब्जा सरकार का। इतना ही नहीं सरकारें तीर्थ यात्रा करने जाने वाले हिंदुओं पर टैक्स भी लगाती हैं और इसके साथ ही जब हिंदू लोग तीर्थ यात्रियों के लिए उनके रास्ते में उनकी सेवा करने के लिए निशुल्क भंडारे लगाते हैं तो उसके लिए भी हिंदुओं को भारी टैक्स देना पड़ता है। हिंदुओं के हिन्दुस्थान में इसे जजिया न कहा जाए तो और क्या कहा जाए ?

यहां विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं

मंदिरों पर सरकारी कब्जों के चलते जहां एक ओर हिंदुओं पर दर्शन करने के बदले टैक्स तो लगाया ही जाता है वहीं उसके साथ ही वहां पर तैनात सरकारी कर्मचारियों के द्वारा आए हुए श्रद्धालुओं के साथ अशिष्टाचार भी किया जाता है। जिन की खबरें अक्सर मिलती रहती हैं। अब नया मामला आया है आंध्र प्रदेश के श्री तिरुपति बालाजी मंदिर का। बताने की आवश्यकता नहीं है यह मंदिर हिंदुओं में बहुत ज्यादा महत्व रखता है। इस मंदिर के बारे में हिंदुओं में श्रद्धा ऐसी है कि लोग बहुत दूर-दूर से बल्कि विदेशों से भी यहां पर दर्शन करके अपना भाग्य बनाने आते हैं। और जैसा कि हर जगह है यहां तिरुपति बालाजी मंदिर पर भी सरकार का कब्जा है।

यहां नौकरशाहों और नेताओं का प्रभाव चलता है

यहां पर दर्शनों के लिए एक पर्ची सिस्टम बनाया गया है। ठीक वैसा ही जैसा जम्मू कश्मीर के मां वैष्णो देवी तीर्थ स्थल में बना हुआ है। भारी भीड़ होने के कारण यहां पर दर्शन करने के लिए लंबी-लंबी लाइने लगती हैं और समय भी बहुत लगता है। परंतु सरकार के कब्जे में होने के कारण यहां पर सरकार के नौकरशाहों का और नेताओं का प्रभाव भी चलता है, जिसके चलते सरकारी अफसरों और नेताओं के प्रभाव से यहां दर्शन बहुत जल्दी सुलभ हो जाते हैं। आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में उस समय हो हल्ला हो गया जब वहां पर पहुंची 1 तीर्थयात्री महिला को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तो उसने मंदिर में बने कार्यालय में जाकर अपना विरोध जताया।

50000 की मांग की गई

महिला का आरोप है की मिली दर्शन पर्ची के अनुसार दर्शन करने में कुछ दिन लगने वाले थे, जिस कारण वह एक विधायक का पत्र लेकर दर्शन करने के लिए पहुंची। महिला ने आगे बताया है कि दर्शन करने की उस पर्चे पर कोई समय सीमा नहीं लिखी गई थी, परंतु मंदिर में तैनात सरकारी कर्मचारियों के द्वारा उन्हें विधायक के पत्र के बावजूद भी दर्शन नहीं करने दिए और इसके साथ ही उससे ₹50000 की मांग भी की गई है। जिस कारण हताश महिला जब 50,000 मांगने वाले सरकारी कर्मचारियों से इसका कारण पूछने लगी तो वहां पर उपस्थित दो पुरुष कर्मचारियों में से एक ने उसे कमर से पकड़ कर खींचा और दूसरे ने महिला की छातियों पर दवाब देते हुए उसे पीछे की ओर धकेल दिया

सरकारी बाबुओं का मंदिर में हिंदुओं से व्यवहार

यहां से बहुत बड़ा प्रश्न उठता है कि हिंदू इस तरह का सरकारी अत्याचार आखिर कब तक सहते रहेंगे ? क्योंकि मंदिर हिंदुओं के, भगवान हिंदुओं के, श्रद्धा हिंदुओं की, मंदिरों में चढ़ाए जाने वाला धन हिंदुओं का फिर भी उसके ऊपर सरकार का कब्जा क्यों ? सरकार का कब्जा है तो हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार क्यों ? और आज तक किसी को भी यह नहीं पता है कि हिंदुओं के द्वारा मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले अथाह धन का कहां पर प्रयोग किया जा रहा है ? कुछ थोड़ा बहुत दिखता भी है परंतु का बाकी का पैसा आखिर जाता कहां है ? आरोप लगते रहते हैं कि सरकार के द्वारा हिंदुओं द्वारा चढ़ाया गया चढ़ावा मदरसों के लिए दिया जाता है और उससे मौलवियों को तनख्वाहें दी जाती हैं।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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