Maa Naina Devi famous pilgrimage one of the 51 Shakti Peethas, glory of mother and everything about this Shakti Peetha.”

शक्ति स्वरूपा मां जगदम्बा को प्रणाम बारंबार प्रणाम🙏🙏

सनातन🚩समाचार🌎जगत जननी मां जगदम्बा जी के पृथ्वी पर 51 परसिद्ध शक्ति पीठ हैं, जो सभी अपने आप में दिव्य शक्तियों का आभास देने वाले हैं। इन सभी शक्तिपीठों में श्रद्धालु दूर दूर से बहुत भाव से दर्शन करने अपना भाग्य बनाने पहुंचते रहते हैं।

आज बात करेंगे “शक्तिपीठ मां नैना देवी” जी की

नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है। यह शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों पर स्थित एक भव्य मंदिर है। यह देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह पवित्र तीर्थ समुद्र तल से 11000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। नैनी झील के किनारे बना “नैना देवी मंदिर” (Naina Devi Temple) 51 शक्तिपीठों में से है। यहाँ प्रयुक्त नैना शब्द से तात्पर्य, माता सती की आँखों से है। इस मंदिर में माता सती की आँखों को पूजा जाता है।

प्रसिद्ध कथा के अनुसार…..

कथा के अनुसार जब देवी सती जी ने स्वयं का अंत कर लिया था, तब भगवान शिव जी व्यथित हो उठे। उन्होंने सती के शव को अपने  कंधे पर उठाया और तांडव नृत्य शुरू कर दिया। जिससे सभी देवता भयभीत हो उठे, भोलेनाथ का यह रूप प्रलय ला सकता था। सभी देव गणों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि अपने चक्र से सती के शरीर को टुकड़ों में विभक्त कर दें। श्री नैना देवी मंदिर वह स्थान है जहां देवी सती के नेत्र गिरे थे।

https://youtu.be/iN_i0a2XXvk?si=lqYR78JVd0i-nzmr

मंदिर में पीपल का पेड़ मुख्य आकषर्ण का केंद्र है जो शताब्दियों पुराना है। मंदिर के मुख्य द्वार के दाई ओर भगवान श्री गणेश और हनुमान कि मूर्ति है। मंदिर के गर्भ ग्रह में मुख्य तीन मूर्तियां हैं। दाई ओर माता काली की, मध्य में नैना देवी की और बाई ओर भगवान गणेश की प्रतिमा है। यहां एक पवित्र जल का तालाब है, जो मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मंदिर के समीप एक गुफा भी है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है। पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए 1.25 कि॰मी॰ की पैदल यात्रा की जाती थी परन्तु अब मंदिर प्रशासन द्वारा मंदिर तक पहुंचने के लिए उड़नखटोले (Ropeway) का प्रबंध किया गया है।

अधिक विवरण ……..

उपलब्ध कथा के अनुसार- देवी सती ने स्वयं को यज्ञ में जिंदा जला दिया था। कहा जाता है कि भगवान शिव जब माता सती के दग्ध शरीर को आकाश मार्ग से कैलाश पर्वत की ओर ले जा रहे थे, इस दौरान भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर को विभक्त कर दिया था। तभी माता सती की बांयी आँख (नैन या नयन) नैनीताल में तथा दांयी आँख हिमाचल प्रदेश के नैना देवी नाम के स्थान पर गिरी थी और इसी कारण यहाँ नैना देवी मंदिर की स्थापना हुई।

श्री नैना देवी मंदिर महिशपीठ नाम से भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर मां श्री नैना देवी जी ने महिषासुर का वध किया था। किंवदंतियों के अनुसार, महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस था जिसे श्री ब्रह्मा जी द्वारा अमरता का वरदान प्राप्त था, लेकिन उस पर शर्त यह थी कि वह एक अविवाहित महिला द्वारा ही परास्त हो सकता था। इस वरदान के कारण, महिषासुर ने पृथ्वी और देवताओं पर आतंक मचाना शुरू कर दिया।

राक्षस का सामना करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को संयुक्त किया और एक देवी को बनाया जो उसे हरा सके। देवी को सभी देवताओं द्वारा अलग-अलग प्रकार के शस्त्रों की भेंट प्राप्त हुई। महिषासुर देवी की असीम सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गया और उसने शादी का प्रस्ताव देवी के समक्ष रखा। देवी ने उसे कहा कि अगर वह उसे हरा देगा तो वह उससे शादी कर लेगी। लड़ाई के दौरान, देवी ने दानव को परास्त किया और उसकी दोनों आंखें निकाल दी थीं।

उल्लेखनीय है की इस मंदिर में एक बड़ा हवन कुंड बना हुआ है जिसमे निरंतर अग्नि प्रज्वलित रहती है। इस हवन कुंड के बारे में मेंदिर के पुजारियों द्वारा बताया जाता है की यहां पर सिख परम्परा में दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी के द्वारा यहां पर हवन करके मां दुर्गा जी को प्रसन्न करके उनसे शक्ति (खड़ग) प्राप्त की थी। वहीं दूसरी ओर कुछ सिख बंधु इस बात का खण्डन भी करते हैं। बहरहाल यहां पहुंच कर देखा जा सकता है की इस शक्तिपीठ पर बहुत सारे सिख बंधु भी हाजिरी लगवाने पहुंचते हैं।

मां के चमत्कार…..

इस कलयुग के अंदर भी श्री नैना देवी मंदिर में दो चमत्कार विद्यमान है. पहला चमत्कार है माता जी का प्राचीन हवन कुंड कहते हैं कि इसमें जितना मर्जी हवन करते जाओ शेष कभी नहीं उठाना पड़ता. सारी राख भभूति इसी के अंदर समा जाती है. इस हवन कुंड में श्रद्धालु विजय प्राप्ति के लिए, दुख रोग कष्ट दूर करने के लिए, धन प्राप्ति के लिए कई प्रकार के हवन किए जाते हैं. कहते हैं कि घर में 100 हवन  करने के बराबर इस हवन कुंड में एक हवन की मान्यता है. 

दूसरा चमत्कार है माताजी की ज्योतियों का आना मां ज्वाला देवी माता श्री नैना देवी से मिलने आती है. सबसे पहले ज्योति के दर्शन माता के त्रिशूल पर होते हैं. उसके बाद श्रद्धालुओं के हाथों पर. पीपल के पत्तों पर ज्योतियों के दर्शन होते हैं और यह 15 से 20 मिनट तक चमत्कार देखने को मिलता है. उस समय मौसम बहुत भयानक हो जाता है. उस दौरान तेज तूफान आता है और बिजली कड़कती है. एकदम लाइट चली जाती है और उसमें माता की ज्योति प्रकट होती है. सभी श्रद्धालु जो उस समय मंदिर में होते हैं उन्हें माता की ज्योत के दर्शन होते हैं.

आंखों की रोशनी ठीक करती है मा श्री नैना देवी जी

श्रद्धालुओं की आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी हो या कोई बीमारी अगर श्रद्धालु माता के दरबार में चांदी के नेत्र चढ़ाता है तो उसकी आंखों की रोशनी ठीक हो जाती है. प्राचीन काल से ही श्रद्धालु अपनी आंखों की कुशलता के लिए माता श्री नैना देवी के दरबार में चांदी के नेत्र अर्पित करते आए हैं और ऐसे भी कई चमत्कार देखने को मिले हैं जब माता की कृपा से श्रद्धालुओं की आंखों की रोशनी ठीक हो गई है.

मंदिर सुबह 6 बजे की आरती से खुलता है और शाम की आरती के पश्चात् 10 बजे बंद हो जाता है।

नवरात्री (सितंबर/अक्टूबर), श्रावणी मेला (जुलाई/अगस्त) या चैत्र मेला (मार्च/अप्रैल) में आकर श्रद्धालु जन यहाँ की संस्कृति और धार्मिक महत्ता को नजदीक से जान सकते हैं।

जय माता दी

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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