Torture on the saint, no bail for 1 second since last 11 years, health is very bad, why did people walk 200 kilometers? Know a lot.”

ये कैसा कानून है ? ये कैसी सरकार है ? आखिर ये कैसा अत्याचार है ???1

सनातन🚩समाचार🌎(रेखा) यह बहुत विचित्र बात है कि एक और जहां बड़े-बड़े अपराधी जमानत पर आराम से घूम फिर रहे हैं और नेता भी जमानतों पर जेल से बाहर आकर मौज करते रहते हैं, तो वहीं दूसरी ओर सनातन संस्कृति के रक्षक संत बार-बार जेल में डाल दिए जाते हैं और फिर शुरू होता है अन्याय का अंतहीन दौर। बताने की आवश्यकता नहीं है की आजाद हिंदुस्तान में जिस जिस भी बड़े संत ने सनातन धर्म की रक्षा और उसका प्रचार प्रसार किया उसे ही जेल  में ठूंस दिया गया। सभी पर एक ही आरोप “यौन शोषण” का।

भले ही वह नित्यानंद जी हों, कृपालु मुनि जी हों, शंकराचार्य जी हों,  बाबा राम रहीम जी हों और वर्तमान में संत श्री आसाराम जी बापू भी उसी षडयंत्र का शिकार हो चुके हैं जो इन सभी के साथ हुआ है।   बापू आसाराम जी के बारे में बहुत विचित्र बात यह है कि उनकी आयु 88 वर्ष की है और वह मात्र एक आरोप के चलते 11 सालों से निरंतर जेल में हैं। प्रश्न उठता है कि आखिर क्या कारण है जो उन्हें एक सेकंड की भी जमानत अथवा पैरोल नहीं दी गई है।

अब जबकि उनका स्वास्थ्य एक खतरनाक स्थिति तक खराब हो चुका है उनके द्वारा बार-बार अदालत में याचिकाएं लगाई जा रही हैं कि उन्हें उचित इलाज के लिए पैरोल दे दी जाए किंतु उन्हें किसी भी प्रकार की कोई राहत नहीं मिल रही है। बता दें कि वर्तमान में संत श्री आसाराम जी बापू हृदय रोग से ग्रसित हो चुके हैं पता चला है कि उनके हृदय की दो नलिकाएं 90% बंद हैं तथा साथ ही उनकी छोटी आंत में भी घाव है जिससे निरंतर रक्त का बहाव जारी है।

जिस कारण उन्हें बार-बार खून चढ़ाना पड़ रहा है। उन्हें लगातार स्वास्थ्य खराब होने के कारण जेल प्रशासन के द्वारा बार बार जोधपुर की एम्स हॉस्पिटल में भर्ती करवाया जा रहा है तथा कुछ ठीक होने के बाद उन्हें पुनः जेल में डाल दिया जाता है। ऐसा क्रम लगातार अब चल रहा है इस सब के बीच उनके द्वारा हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट तक में भी गुहार लगाई गई है कि उन्हें समुचित इलाज के लिए जमानत दी जाए किंतु हर बार अदालत से निराशा ही हाथ लग रही है।

संत श्री आसाराम जी बापू के चाहने वालों की माने तो सभी एक सुर में कहते नजर आ रहे हैं कि उनके साथ बहुत बड़ा षड्यंत्र हुआ है। बताने की आवश्यकता नहीं है की बापूजी के समर्थक समय-समय पर लगातार उनके पक्ष में बड़ी-बड़ी रैलियां करते रहते हैं इसके साथ ही बापू जी के द्वारा निर्देशित किए जाने के बाद बापूजी के शिष्य प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाते हैं जो अब सभी हिंदुओं के लिए एक त्यौहार बन चुका है  इसके साथ ही 14 फरवरी को बापूजी के आदेश से उनके शिष्य मातृ पितृ पूजन दिवस मनाते हैं।

यह बात सही है की अब यह दोनों उत्सव हिंदू समाज का अंग बनते जा रहे हैं। अब जबकि उनका स्वास्थ्य बेहद खराब है जिसको देखते हुए अब बहुत सारा संत समाज उनके पक्ष में बोलने लगा है। सभी लोग अब उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं। इस बीच संत श्री आसाराम जी बापू जी के पक्ष में एक प्रखर आवाज बनकर उभरे हैं स्वामी अमृतानंद जी, जो की प्रचंड शक्ति का केंद्र वृंदावन धाम में स्थित रमण रेती से संबंध रखते हैं।

इनके द्वारा लंबे समय से पूजा बापू जी के पक्ष में आवाज उठाई जा रही है। और अब इन्होंने 24 फरवरी 2024 से 6 मार्च 2024 तक 12 दिन की राजस्थान के भरतपुर से जयपुर तक की पद यात्रा रैली निकली है जिसे इन्होंने न्याय यात्रा का नाम दिया है। उनकी इस रैली में भारी संख्या में लोग शामिल हुए और निरंतर उनके साथ लगभग 200 किलोमीटर पैदल चलते रहे।

सनातन🚩समाचार🌎 प्रत्यक्ष दर्शी है कि उनके साथ चल रहे लोगों के पैरों में छाले पड़ गए, जख्म हो गए किंतु उन्होंने बापूजी के पक्ष में चल रही इस पदयात्रा को नहीं छोड़ा लगातार चलते ही रहे और सभी परेशानियों को झेलते हुए स्वामी अमृतानंद जी के साथ 6 मार्च 2024 को एक बहुत भारी जन सैलाब के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री के ऑफिस तक पहुंच गए। वहां उनके काफिले को बहुत पहले ही पुलिस के द्वारा बड़े आदर के साथ रोक दिया गया। सुरक्षा कारणों से स्वामी अमृतानंद जी सहित केवल पांच लोग ही मुख्यमंत्री राजस्थान से मिल पाए।

मुख्यमंत्री को इन लोगों ने एक विज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि पूज्य बापू जी के खिलाफ हुए षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए शीघ्र ही रिटायर्ड जजों और सीबीआई के रिटायर्ड बड़े अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी बनाई जाए जो इस मामले की निष्पक्ष जांच करे। साथ ज्ञापन में यह भी कहा गया कि शीघ्र ही निर्दोष संत श्री आसाराम जी बापू को न्याय देने के लिए सभी मार्ग खोले जाएं। उन्होंने ज्ञापन देने के बाद अपने साथ आए हुए असंख्य लोगों को विश्वास दिलाया की मुख्यमंत्री राजस्थान ने उनकी बातें बहुत गंभीरता से सुनी हैं।

बहरहाल आशा की जानी चाहिए कि स्वामी अमृतानंद जी और उनके साथ चल रहे बहुत सारे उन लोगों की तपस्या निष्फल नहीं जाएगी जिन्होंने लगभग 200 किलोमीटर तक बहुत सारी परेशानियां झेलते हुए पूज्य बापू जी को न्याय दिलवाने के लिए पैदल यात्रा की। हालांकि उनमें से कई लोगों के पैरों में छाले भी पड़ गए थे किंतु वह लोग निरंतर संत श्री आसाराम जी बापू की जय जयकार करते हुए निरंतर भरतपुर से जयपुर की ओर बढ़ते ही रहे।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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