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The banks of the river are being settled in a planned manner, illegal tombs are being built piecemeal. Everywhere green and high religious flags.”

क्या वाकई में ये योजना बना कर किया जा रहा है ? क्या ये बढ़ती जनसंख्या के द्वारा अपने रहने लिए जमीनें घेरी जा रही हैं ?

सनातन 🚩समाचार🌎 एक तरफ जहां सारे देश में भूमि हथियाने के लिए जगह-जगह पर जमीनें घेर कर मजारें बनाई जा रही हैं तो वहीं दूसरी ओर देश में एक ऐसा प्रदेश भी हैं जहां के स्थानीय निवासी उस प्रदेश से पलायन कर रहे हैं क्योंकि वहां पर तरक्की करने के संसाधन कम है। परंतु आश्चर्य की बात यह है उसी प्रदेश में बाहरी प्रदेशों के लोग जाकर बस रहे हैं वह भी अवैध रूप से जमीनों पर कब्जे करके।

हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की। उत्तराखंड का देहरादून इलाका आजकल उन लोगों के लिए जन्नत बना हुआ है जो लोग मैदानी इलाकों से वहां जाकर अवैध रूप से जमीनें घेर कर अपने ठिकाने बना रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों ने अभी झुग्गियां ही बनाई हुई हैं। कुछ लोगों ने टीन के शेड डाल दिए हैं और कुछ लोगों ने तो पक्के मकान भी बना लिए हैं। और इस सब के साथ साथ मजारें बनाने का खेल तो चल ही रहा है।

दरअसल देहरादून जिले के सेलाकुई क्षेत्र में गधेड़ो नदी के किनारे बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से बहुत सारे लोग मैदानी इलाकों से आकर अपना बसेरा बना रहे हैं। बता दें की वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे करके मुस्लिम समुदाय के लोग अपने घर बना रहे हैं। और चारों ओर हरे रंग के मजहबी झंडे लहरा रहे हैं। एक तरफ जहां उत्तराखंड का वन विभाग छोटी-छोटी गैर सरकारी और सरकारी बिल्डिंगों के बनाए जाने पर आपत्ति कर देता है तो वहीं दूसरी ओर जब वन विभाग की ही जमीन पर इस तरह से अवैध अतिक्रमण किया जाता है तो विभाग के अधिकारी आंखें बंद कर लेते हैं।

वन विभाग के दोगले व्यवहार का प्रमाण यह है कि देहरादून जिले के सेलाकुई स्थित मेंटल कॉलेज से आगे नदी के किनारे हजारों की संख्या में उत्तर प्रदेश से आए हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने अवैध कब्जे करके वहां पर टीन शेड डाल दिए हैं। और कुछ मकान तो पक्के भी बना लिए गए हैं। यहां पर अवैध कब्जा करने वाले लोग अधिकतर सीतापुर, लखीमपुर खीरी, देवबंद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत और बहेड़ी इत्यादि जिलों के हैं। इतना ही नहीं यहां पर कुछ परिवार दो बिहार और असम से भी पहुंचे हुए हैं। इन सभी ने यहां पर अवैध कब्जे करके अपने मजहबी झंडे गाढ़े हुए हैं।

स्थानीय लोगों की माने तो यह सारे अवैध कब्जे वोटों के लालच में एक स्थानीय कांग्रेस के नेता के द्वारा करवाए जा रहे हैं। पता चला है कि यह नेता जिला पंचायत का सदस्य भी रह चुका है। इस ने यहां पर अपनी वोट बढ़ाने के लिए लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाएं हैं और फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने के आरोप भी लग रहे हैं।

इस तरह से जहां उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है तो वहीं पर दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो दिन रात वन विभाग के जंगलों में नई-नई उग रही मजारों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं। इन लोगों में मुख्य रूप से काम करने वाली राधा धोनी नाम की एक महिला ने बताया है की देहरादून के आसपास के जंगलों में बहुत बुरी स्थिति है। यहां पर जंगलों को साफ करके नई नई मजारे बनाई जा रही हैं। जिसके बारे में जंगलात विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है।

मजारें ही मजारें

जिस कारण हमे खुद ही वहां पहुंचकर मजारों को अपने हाथों से तोड़ना पड़ता है। उन्होंने बताया है कि इस सबके चलते कई बार हम पर हमले भी किए जा चुके हैं परंतु हमने यह प्रण ले रखा है कि हम हम देव भूमि उत्तराखंड को मजार भूमि नहीं बनने देंगे और मजारों पर हथौड़े चलाते जी रहेंगे।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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