Nupur Sharma, Naveen Jindal, a Hindu upset by the expulsion of BJP and the statements of the RSS chief, said Ashwani Hindu.”

बहुत बड़ा घमासान छिड़ गया है हिंदुओं के दिमाग में, क्या अब वाकई में कोई और विकल्प चाहिए हिंदुओं को ?

चर्चित मुद्दा/परेशान हिंदू

सनातन🚩समाचार🌎 पिछले काफी समय से लगातार हिंदू बहुत मानसिक यातना के दौर से गुजर रहे हैं। कभी ओवैसी माता जानकी जी के बारे में सरेआम मंच पर माइक से बहुत गलत बोल देता है और कभी कोई कॉमेडियन हिंदू देवी देवताओं का अपमान करता है। साथ ही मंदिरों का टूटना, लव जिहाद और जबरन और लालच देकर ईसायीकरण तो हो ही रहा है। इस सब के बीच ही बहुत देर से चल रहा मामला ज्ञानवापी का आ गया। इसमें हिंदुओं के आराध्य भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए हैं, परंतु उन्हें फव्वारा बताकर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया जा रहा है। इस बारे में टेलीविजन चैनलों पर डीवेट भी चल रही हैं। हर रोज हो रही है इन डीवेटों में हर रोज तरह तरह के शब्दों से सनातन धर्म का अपमान किया जाता है।

वो बड़े-बड़े मौलाना भी स्पष्ट कहते हैं

ऐसे ही एक डिबेट में भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा जी बैठी हुई थीं तो उनसे बहस करने वाले एक व्यक्ति ने जब शिवलिंग के बारे में बहुत ज्यादा गलत बोल दिया तो उसी बहस बाजी के चलते नूपुर शर्मा ने भी वह बातें कह दी जो इस्लाम की पुस्तकों में दर्ज हैं, और जो बातें नूपुर शर्मा के द्वारा कही गई हैं वो बड़े-बड़े मौलाना भी स्पष्ट कहते हैं। अंतर केवल इतना है की नूपुर शर्मा के द्वारा कही गई बातें एक बहस में कही गई थी। इसके बाद बहुत हो हल्ला हुआ और आखिर नूपुर शर्मा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता नवीन जिंदल को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

सनातन समाचार को अपने बहुत सारे पाठकों के संदेश प्राप्त हुए हैं

जैसा कि सभी जानते हैं कि इन दोनों को पार्टी से निकाले जाने के बाद बीजेपी के लगभग सभी कार्यकर्ता खिन्न हैं और अपने अपने स्तर पर इसका विरोध भी जता रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के पक्ष में पूरी तरह खड़ा हुआ नजर आ रहा है। ट्विटर पर हेशटेग चलाए जा रहे हैं। फेसबुक पर समर्थन हो रहे हैं और व्हाट्सएप पर भी नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के पक्ष में संदेश फॉरवर्ड किए जा रहे हैं। सनातन🚩समाचार🌎 को अपने बहुत सारे पाठकों के संदेश प्राप्त हुए हैं, और फोन भी मिले हैं जिनमें सभी लोगों ने अपनी अपनी राय रखी है और लगभग सभी लोगों के द्वारा एक ही बात कही गई है कि नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के साथ अन्याय हुआ है।

“भगवान शिव का अपमान”

पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण भारतीय जनता पार्टी से निलंबित की गई नूपुर शर्मा ने रविवार को वह बयान बिना शर्त वापस ले लिया, जो पिछले दिनों टेलीविजन में एक बहस के दौरान दिया था, साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुकीं शर्मा ने दावा किया कि पैगंबर मोहम्मद के बारे में उनकी टिप्पणी “भगवान शिव का अपमान” किए जाने की प्रतिक्रिया के रूप में थी, क्योंकि वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकीं।

दिल्ली के हर फुटपाथ पर बहुत

नूपुर शर्मा ने ट्विटर किया है की मैं पिछले कई दिनों से टीवी डिबेट पर जा रही थी, जहां रोजाना मेरे आराध्य शिवजी का अपमान किया जा रहा था। मेरे सामने यह कहा जा रहा था कि वो शिवलिंग नहीं फव्वारा है, दिल्ली के हर फुटपाथ पर बहुत शिवलिंग पाए जाते हैं, जाओ जा के पूजा कर लो। मेरे सामने बार-बार इस प्रकार से हमारे महादेव शिवजी के अपमान को मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और मैंने रोष में आके कुछ चीजें कह दीं। अगर मेरे शब्दों से किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो मैं अपने शब्द वापस लेती हूं. मेरी मंशा किसी को कष्ट पहुंचाने की कभी नहीं थी।

RSS के स्वयंसेवक हतोत्साहित हो रहे हैं

नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के इस सारे प्रकरण से तो हिंदू समाज परेशान है ही परंतु साथ ही एक और चर्चा इन दिनों हिंदुओं में छिड़ी हुई है वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी के बयानों की। बताने की आवश्यकता नहीं है कि पिछले बहुत समय से मोहन भागवत जी ऐसे बयान देते आ रहे हैं जिस से लगातार RSS के स्वयंसेवक हतोत्साहित हो रहे हैं।

अभी हाल ही में मोहन भागवत जी के द्वारा यह कहा गया है कि हर एक मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना ? और उनके द्वारा एक बार फिर से कहा गया है कि हिंदुओं को यह समझना चाहिए कि मुसलमान उनके अपने पूर्वजों के वंशज हैं और खून के रिश्ते से वह उनके भाई हैं। RSS प्रमुख के ऐसे ही बयानों से कि अब सारे हिंदू समाज में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है हमें हमारे बहुत सारे पाठकों के संदेश मिले हैं जिनमें लगभग सभी ने अपनी नाराजगी जताई है।

इन मिले संदेशों में हमारे एक नियमित पाठक श्री दीपेश जैन जी ने लिखा है कि भाजपा व संघ भूल रहे हैं कि अडवाणी जी को shining India का गुमान ले डूबा था।

मोदी जी के विकास पर कोई संशय नहीं परंतु हिन्दू ने वोट सड़कों के लिए नहीं स्वाभिमान के लिए दिया था और आगे देगा। विकास सरकार का मूल कार्य है, जो किया ही जाना चाहिए। लेकिन समर्थकों की अपेक्षा की अवहेलना करने वाला नेतृत्व सफल नहीं हो पाता। शिव सेना का उदाहरण सामने है।

न ही संघ का कार्यकर्ता संघ से समाज सेवा के लिए जुड़ता या अपेक्षा रखता है। सेवा हिन्दू स्वाभिमान स्थापित करने का रास्ता हो सकता है, लक्ष्य नहीं…

सरसंघचालक जी की बात से स्पष्ट होता है कि संघ के द्वारा राम मंदिर का विषय मजबूरी में लिया गया। लेकिन कार्यकर्ता से तो पूछ कर देखो कि क्या स्वयंसेवकों ने संघ की मजबूरी को ढोया या यह विषय उन की वेदना से जुड़ा था ??

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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