High Court became strict on those who insult Lord Shri Ram and gave this decision.”

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और राजद नेता व बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव जैसे नेताओं ने लगातार बयान देकर 2023 में श्री रामचरितमानस को बदनाम करने के प्रयास किए।

सनातन🚩समाचार🌎 9 नवंबर 2019 को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के पक्ष में अदालत द्वारा दिए गए फैसले के बाद से हिंदू द्रोहियों ने भगवान श्री राम जी के खिलाफ हर तरह से मोर्चे खोल लिए थे। जिनमें से एक बड़ा मोर्चा भगवान श्री राम जी की गाथा बताने वाले  ग्रंथ श्री रामचरितमानस के खिलाफ भी खोला गया था।

इस पवित्र ग्रंथ से सभी सनातनियों की आस्था जुडी हुई है। ऐसे में इस पवित्र ग्रंथ के बारे में कुछ धर्मद्रोहियों ने एक तरफ जहां गलत बयान बाजियां की तो वहीं दूसरी ओर इस पवित्र ग्रंथ को फाड़कर आग भी  लगा दी गई थी।

अब अब उसे फाड़ने और जलाने के मामले में दो हिंदू विरोधियों पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटाने के बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट इनकार कर दिया है। बताने की आवश्यकता नहीं है की दो लोगों ने श्री रामचरितमानस की प्रतियां  खुलेआम फाड़कर जला दी थीं। गोस्वामी तुलसीदास जी के द्वारा रचित श्री रामचरितमानस का सभी सनातनियों के हृदय में विशेष महत्व है। तुलसीदास जी ने सरल भाषा में श्री राम जी की गाथा का रामचरितमानस में विवरण किया है।

इस पवित्र पवित्र ग्रंथ के बारे में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने लगातार अपमानजनक बयान बाजी करते हुए वर्ष 2023 में श्री रामचरितमानस को बदनाम करने के प्रयास किए थे।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दो व्यक्तियों ने श्री रामचरितमानस के अंग खुलेआम जला दिए थे, जिन पर जिलाधीश के आदेश पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत केस दर्ज किया गया था। इन दोनों व्यक्तियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती दी थी जिसे अब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

बतादें की सतनाम सिंह नाम के एक व्यक्ति ने 29 जनवरी 2023 को श्री रामचरितमानस जलाए जाने के खिलाफ स्थानीय PGI थाने में मामला दर्ज करवाया था। स्थानीय वृंदावन कॉलोनी में श्री रामचरितमानस के पन्ने फाड़ने और जला देने के बाद तब समाज में भारी आक्रोश फैल गया था और तनाव बढ़ गया था।

शुक्रवार 5 जनवरी 2024 को श्री रामचरितमानस का अपमान करने वालों देवेंद्र प्रताप यादव एवं सुरेश सिंह यादव की याचिका रद्द करते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी और जस्टिस संगीता चंद्र की खंडपीठ ने कहा कि इन दोनों ने अपनी सहयोगियों के साथ मिलकर दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थल पर भगवान राम के जीवन के घटनाक्रम से संबंधित ग्रंथ का जिस तरह से अपमान किया उससे सामाज का अक्रोशित होना स्वाभाविक है।

निर्णय देते समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्री रामचरितमानस को हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं और आस्था से भी जोड़ा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के वर्तमान युग में हर व्यक्ति इससे जुड़ा हुआ है और ऐसे में ऐसी घटनाओं से समाज में धार्मिक उन्माद और तनाव फैल सकता है।

साथ ही खंड पीठ ने प्रशासन द्वारा NSA लगाने का निर्णय भी उचित और सही माना है। खंडपीठ के अनुसार जिस तरह का व्यवहार दोनों आरोपियों ने किया उससे हिंदुओं का आक्रोशित होना  स्वाभाविक था।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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