The campaign started 90 years ago was completed on 15 August 1947 with the independence of India and the horrific massacre of Hindus, know everything.”

जान बूझ कर अपनी जन संख्या घटा रहे हिंदू अब अपनी आजादी नहीं बल्कि अस्तित्व ही खो देंगे।

ऐसे बना पाकिस्तान

सनातन 🚩समाचार🌎 भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी के साथ ही देश को हुआ बंटवारा और लाखों हिंदुओं की बिछी लाशें और हिंदू स्त्रियों के सामूहिक क्रूर बलात्कार। जानिए इस आजादी से पहले देश में चल क्या रहा था ?

  1. 1857 से लेकर 1947 तक अर्थात 90 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद हिंदुओं को आजादी मिली ? सन् 1947 में भारत के विभाजन, हिंदुओं के नरसंहार के बाद से आज 15 अगस्त 2022 तक हिंदुओं की जो स्थिति है उसे देखते हुए प्रश्न उठता है की क्या हिंदुओं के लिए वाकई में ये ‘स्वतंत्रता दिवस’ है ? 1857 के पहले भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। वर्तमान भारत का क्षेत्रफल लगभग 33 लाख वर्ग किमी से भी कम है।
  2. 1857 की क्रांति के असफल होने के बाद अंग्रेजों को एक बात तो समझ में आ गई थी कि अब इस देश में लंबे काल तक शासन करना मुश्किल होगा। इसीलिए उन्होंने भारत को धर्म, जाति और प्रांत के आधार पर बांटने की योजना बनाई। भारत को तोड़ने की प्रक्रिया के चलते उन्होंने हिंदू और मुसलमानों को अलग-अलग दर्जा देना प्रारंभ किया।
  3. भारत विभाजन की योजना को 3 जून/ ‘माउंटबैटन प्लान’ का नाम दिया गया। इसमें सभी मुस्लिम नेताओं के साथ बैठकें की गईं और मोहम्मद अली जिन्ना को माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू के साथ जोड़ दिया।
  4. 1906 में ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना कर दी गई क्योंकि मोहम्मद अली जिन्ना को लगता था की मुसलमानों का भविष्य हिंदुओं के साथ सुरक्षित नहीं है। आखिरकार लाहौर में 1940 के मुस्लिम लीग सम्मेलन में जिन्ना ने साफ तौर पर कह दिया वह मुसलमानों के लिए अलग मुल्क चाहता है।
  5. मुस्लिम लीग से पाकिस्तान की मांग उठवाई गई और फिर उसके माध्यम से सिंध और बंगाल में हिन्दुओं का कत्लेआम कराया गया। अगस्त 1946 में ‘सीधी कार्रवाई दिवस’ मनाया और कलकत्ता में भीषण दंगे किए गए जिसमें करीब 5,000 हिंदू मारे गए और बहुत से घायल हुए। यहीं से दंगों की शुरुआत हुई।
  6. इसके बाद भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना ( 3 जून प्लान’ ) के आधार पर तैयार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर किया गया। इस अधिनियम में कहा गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत एवं पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बना दिए जाएंगे और उनको ब्रितानी सरकार सत्ता सौंप देगी।
  7. माउंटबेटन ने भारत की आजादी को लेकर जवाहरलाल नेहरू के सामने एक प्रस्ताव रखा था जिसमें यह प्रावधान था कि भारत के 565 रजवाड़े भारत या पाकिस्तान में किसी एक में विलय को चुनेंगे, वे चाहें तो दोनों के साथ न जाकर अपने को स्वतंत्र भी रख सकेंगे। इन 565 रजवाड़ों ने एक-एक करके विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। बचे रह गए थे त्रावणकोर, हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर और भोपाल।‍ जिन्हें भारत में मिलाने के लिए सरदार पटेल ने अभियान चलाया था। हालांकि कश्मीर में वे इसीलिए सफल नहीं हो पाए थे क्योंकि कहा जाता है कि जवाहरलाल नेहरू ने इसमें दखल दिया था।
  8. विभाजन की इस घोषणा के बाद पूरे देश में अफरातफरी का माहौल था। एक तरफ आजादी मिलने की खुशी थी तो दूसरी तरफ बंटवारे का दर्द। सभी यह जानने में लगे थे कि कौन सा क्षेत्र भारत में और कौनसा क्षेत्र पाकिस्तान में रहेगा। इसी के चलते हिन्दू सिख अपनी भूमि और मकान सभी कुछ छोड़ने का दर्द सीने में लिए वे एक अनिश्‍चित भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे थे।
  9. पाकिस्तान से हिंदू और सिखों को जबरन ट्रेन में ठूंस कर भारत भेजा जा रहा था, जबकि भारत के मुसलमान अपनी इच्छा से पाकिस्तान जा रहे थे। ये ज्यादादर मुस्लिम पंजाब, राजस्थान, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के थे। यहां कई क्षेत्रों में मुस्लिमों को पाकिस्तान जाने से रोका जा रहा था, जबकि पाकिस्तान में सेना और कट्टरपंथी मिलकर हिन्दू और सिखों को जबरन बॉडर्र पर धकेल रहे थे।
  10. देश के बंटवारे में अनुमानित आंकड़ों के अनुसार 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गए और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए। केवल 60 दिनों में एक स्‍थान पर सालों से रहने वाले को अपना घर बार, जमीन, दुकानें, जायदाद, संपत्‍ति, खेती किसानी छोडकर हिंदुओं को पाकिस्‍तान से हिंदुस्‍तान आना पड़ा। हालांकि विस्थापन का यह दौर आगे भी चलता रहा, जिनके आंकड़े उपरोक्त से कई गुना हो सकते हैं।
  11. 13 अगस्त 1947 को आजादी के केवल दो दिन पूर्व ही हिंदुस्तान की सरकार ने यह फैसला लिया कि उनकी सरकार सोविय यूनियन के साथ मित्रता का संबंध रखेगी, जबकि पाकिस्तान ने चीन और साऊदी अरब की ओर देखना प्रारंभ कर दिया था।
  12. 13 अगस्त के दिन त्रिपुरा की महारानी ने विलय के कागजात पर अपने दस्तखत किए थे जिसके चलते त्रिपुरा का भारत में विलय हुआ था जबकि इसी दिन 13 अगस्त 1947 को भोपाल के नवाब हमिदुल्ला खान ने भोपाल के विलय से इनकार करते हुए भोपाल के आजाद रखने की मांग रखी थी। 13 अगस्त 1947 को ही फेडरल कोर्ट के चीफ जस्टिस सर हरिलाल जेकिसुनदास कनिया को भारत का चीफ जस्टिस बनाया गया।
  13. भारतवर्ष में 662 रियासतें थीं जिसमें से 565 रजवाड़े ब्रिटिश शासन के अंतर्गत थे। 565 रजवाड़ों में से से 552 रियासतों ने स्वेच्छा से भारतीय परिसंघ में शामिल होने की स्वीकृति दी थी। जूनागढ़, हैदराबाद, त्रावणकोर और कश्मीर को छोडकर बाकी की रियासतों ने पाकिस्तान के साथ जाने की स्वीकृति दी थी।
  14. मार्च 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन, लॉर्ड वावल के स्थान पर वाइसराय नियुक्त हुआ। 8 मई 1947 को वीपी मेनन ने सत्ता अंतरण के लिए एक योजना प्रस्तुत की जिसका अनुमोदन माउंटबेटन ने किया। कांग्रेस की ओर से जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और कृपलानी थे। जबकि मुस्लिम लीग की ओर से मोहम्मद अली जिन्ना, लियाकत अली और अब्दुल निश्तार थे, जिन्होंने विचार-विमर्श करने के बाद इस योजना को स्वीकार किया। प्रधानमंत्री एटली ने इस योजना की घोषणा हाउस ऑफ कामंस में 3 जून 1947 को की थी इसीलिए इस योजना को 3 जून की योजना भी कहा जाता है। इसी दिन माउंटबेटन ने विभाजन की अपनी घोषणा प्रकाशित की।
  15. इस योजना के अनुसार पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं के वे सदस्य, जो मुस्लिम बहुमत वाले जिलों का प्रतिनिधित्व करते थे, अलग एकत्र होकर और गैरमुस्लिम बहुमत वाले सदस्य अलग एकत्र होकर अपना मत देकर यह तय करेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाए या नहीं, दोनों भागों में विनिश्‍चित सादे बहुमत से होगा। प्रत्येक भाग यह भी तय करेगा कि उसे भारत में रहना है या पाकिस्तान में ? पश्‍चिमोत्तर सीमा प्रांत में और असम के सिलहट जिले में जहां मुस्लिम बहुमत है वहां जनमत संग्रह की बात कही गई। दूसरी ओर इसमें सिन्ध और बलूचिस्तान को भी स्वतं‍त्र निर्णय लेने के अधिकार दिए गए।

बलूचिस्तान के लिए निर्णय का अधिकार क्वेटा की नगरपालिका को दिया गया। 4 अगस्त 1947 को लार्ड माउंटबेटन, मिस्टर जिन्ना, जो बलू‍चों का वकील था, सभी ने एक कमीशन बैठाकर 11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा कर दी। विभाजन से पूर्व भारत के 9 प्रांत और 600 रियासतों में बलूचिस्तान भी शामिल था। बतादे की इस घोषणा के बाद माउंटबेटन और पाकिस्तानी नेताओं ने 1948 में बलूचिस्तान के निजाम अली खान पर दबाव डालकर इस रियासत का पाकिस्तान में जबरन विलय करा दिया। जूनागढ़, हैदराबाद, भोपाल, त्रावणकोर और कश्मीर का विलय भारत में बाद में हुआ और सबसे बाद में गोवा, पुदुचेरी, सिक्किम आदि राज्यों का विलय हुआ।

बहुत दर्दनाक

देश का बटवारा तो धर्म और मजहब के आधार पर ही किया गया था

मां भारती के हुए इस बंटवारे के बाद से आज तक हिंदू यही सोच रहे हैं कि उन्हें इस बंटवारे से क्या मिला ? क्योंकि मुसलमानों को उनके मजहब के आधार पर पाकिस्तान मिल गया परंतु हिंदुस्तान के हिंदुओं को आज तक उनका हिंदू राष्ट्र नहीं मिला है क्योंकि देश का बटवारा तो धर्म और मजहब के आधार पर ही किया गया था। और जिस तरह जान बूझ कर हिंदू अपनी जन संख्या घटा रहे हैं उससे स्पष्ट दिख रहा है की अब हिंदू अपनी आजादी नहीं बल्कि अस्तित्व ही खो देंगे।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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