“Jai Bhim Jai Mim” Take back the cases of Muslims, give compensation but Bhim Army remained silent on the havoc on Valmikis.”

वाल्मीकियों को जला कर मार देने के प्रयास किए गए उनके हाथ पैर तोड़ दिए गए।

सनातन🚩समाचार🌎 यह बात बहुत विचित्र किंतु सत्य है कि जय भीम जय भीम के नारे लगाने वाले लोग तब तो बहुत आक्रोशित हो जाते हैं जब कोई मुसलमान पीड़ित होता है, किंतु जब कोई मुसलमान किसी दलित पर अत्याचार करता है तब न जाने क्यों यह लोग चुप्पी साथ लेते हैं।

अब फिर से जय भीम जय भीम की पोल खुल गई है।उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगे के बारे में बताने की आवश्यकता नहीं है कि यहां पर वाल्मीकि समाज के लोगों को बहुत बुरी तरह दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया था। उन्हें जलाकर मारने के प्रयास भी किए गए थे। उनके हाथ पैर तोड़ दिए गए थे। अब जबकि हल्द्वानी के वनभूलपुरा में स्थिति सामान्य होती नजर आ रही है तो इस इलाके में मुस्लिम समाज के लोगों से मिलने के लिए भीम आर्मी वाले पहुंचना चाह रहे हैं।

वनभूलपुरा में 8 फरवरी 2024 को अवैध अतिक्रमण हटाए जाने के बाद अवैध अतिक्रमण के समर्थक बहुत ज्यादा गुस्से में आ गए थे जिसके चलते उन्होंने भारी पथराव किए, आगजनी की, लोगों के हाथ-पैर तोड़े और पुलिस वालों को भी जिंदा जलाकर मार देने के प्रयास किए थे। उस मामले में अभी तक 58 लोगों को पुलिस पकड़ चुकी है तथा अन्य आरोपियों को पकड़ने के प्रयास किया जा रहे हैं, साथ ही आरोपियों के खिलाफ संवैधानिक कार्यवाही भी की जा रही है।

प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार भीम आर्मी के 60 लोग बनभूलपुरा के मुसलमानों से मिलने के लिए वहां पहुंच गए किंतु पुलिस ने उन्हें वनभूलपुरा क्षेत्र से काफी पहले ही हाईवे पर रोक दिया। जिस पर भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत नौटियाल तथा सोनू लाठी इत्यादि की पुलिस से काफी गर्मा गर्मी हो गई। इसके बाद पुलिस उन्हें थाने में ले गई फिर थोड़े समय के बाद उन्हें वापस लौटा दिया।

पुलिस के रवैया से भड़के मनजीत नौटियाल ने घोषणा कर दी है कि अगर उनकी मांगे न मानी गई तो आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि उनकी मांगे हैं बेगुनाह मुसलमानों के मुकदमे वापिस लेना तथा वनभूलपुरा के पीड़ितों को सरकार मुआवजे में ₹60 लाख दे। इसके साथ ही यह मांग भी है की गिराए गए अवैध मदरसे और मस्जिद के बदले मुस्लिम समाज को जमीन दी जाए।

रोष प्रदर्शन करना और अपनी मांगों के बारे में आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है किंतु यह भी एक सत्य है कि हल्द्वानी में हुई हिंसा में बहुत सारे वाल्मीकियों को बुरी तरह से पीटा गया था। जिनमें अधिकतर नगर निगम के कर्मचारी थे।  तब इनपर जमकर अत्याचार किया गया था। इनमें से मिथुन, मनोज कुमार और सागर के हाथ पैर तोड़ दिए गए थे जो अब अपना इलाज करवा रहे हैं। इन पीड़ितों के अनुसार उन्मादियों ने उन्हें जिंदा जलाकर मार देने के प्रयास किए थे।

वनभूलपुरा में हुए दंगों के दौरान मजहबी नारे लगाते हुए जब भारी भीड़ वाल्मीकि समाज की गांधीनगर बस्ती में घुसना चाह रही थी तब अपने परिवारों को उन्मादियों से बचाने के प्रयास में बहुत सारे वाल्मीकि समाज के लोग घायल हो गए थे। इनमें से किसी का सिर फट गया किसी के चेहरे पर घाव लगे और किसी का हाथ टूटा तो किसी का पैर टूट गया। वाल्मीकि बस्ती गांधीनगर की महिलाओं की मांने तो उन्हें आज भी उन्मादियों के खौफनाक चेहरे दिखाई दे रहे हैं जिनको देखकर वह डर जाती हैं।

इस वाल्मीकि बस्ती पर मजहबी नारों वालों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं पत्थर बरसाए और पेट्रोल बम भी फैंके थे। किंतु यह बहुत आश्चर्य की बात है की इन सब घटनाओं की जानकारी सारे देश को तो मिल गई है किंतु भीम आर्मी वालों तक ये  जानकारियां क्यों नहीं पहुंची ?

वैसे भीम आर्मी वाले संदेशखाली में SC महिलाओं पे हुए अत्याचारों पे भी मौन हैं।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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