स्वदेशी पारंपरिक शौचालय या विदेशी सीट ? अक्सर हम लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं और यूं कहा जाए कि आजकल तो विदेशी सीट का प्रचलन एक तरह से आधुनिकता का प्रतीक बन गया है जबकि वास्तविकता यह है कि हमारे महान पुरखे आरम्भ से जिस तरह अपने स्वास्थ्य को संभालते आ रहे रहे हैं वह सब आज भी प्रासंगिक है और विदेशी संस्कारों का अंधाधुंध अनुसरण करने के कारण हमारे जीवन पर बहुत सारे कुप्रभाव भी पढ़ रहे हैं इनको प्रभावों के चलते आज पुनः अपनी प्राचीन रहन-सहन की पद्धतियां की याद आ रही है। वीडियो में सुनिएं इस बारे में आधुनिक डॉक्टर साहब के विचार।

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By Ashwani Hindu

अशवनी हिन्दू (शर्मा) मुख्य सेवादार "सनातन धर्म रक्षा मंच" एवं ब्यूरो चीफ "सनातन समाचार"। जीवन का लक्ष्य: केवल और केवल सनातन/हिंदुत्व के लिए हर तरह से प्रयास करना और हिंदुत्व को समर्पित योद्धाओं को अपने अभियान से जोड़ना या उनसे जुड़ जाना🙏

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