
पटना: बिहार में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य में 3 नई रेल लाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे नालंदा, बोधगया, गया और आसपास के कई जिलों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। इन परियोजनाओं को बिहार और झारखंड के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि जिन प्रमुख रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिली है उनमें गया-दल्तोंगंज वाया रफीगंज रेल लाइन, गया-बोधगया-चतरा रेल कॉरिडोर और गया-नटेश्वर वाया नालंदा रेल परियोजना शामिल है। इन रेल लाइनों के निर्माण के बाद दक्षिण बिहार के कई इलाकों में यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
दरअसल, लंबे समय से मगध क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को लेकर मांग उठती रही है। कई इलाकों में लोग अब भी सड़क परिवहन पर निर्भर हैं। नई रेल लाइन बनने से न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से माल ढुलाई आसान होगी और स्थानीय बाजारों को भी नई गति मिलेगी।
गया-बोधगया-चतरा रेल कॉरिडोर को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बोधगया दुनियाभर के बौद्ध श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है। हर साल यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। नई रेल लाइन बनने से बोधगया तक पहुंचना और आसान होगा। इसके साथ ही नालंदा और राजगीर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को भी सीधा फायदा मिलेगा।
इसी बीच रेलवे बोर्ड की ओर से बिहार में कई अन्य रेल परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। हाल ही में 29 नई रेल लाइनों के सर्वे को भी मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा किउल-झाझा थर्ड लाइन परियोजना और बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलखंड के दोहरीकरण जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी राज्य में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे रहे हैं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गया, औरंगाबाद, नालंदा और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं। वहीं यात्रियों का समय बचेगा और सड़क मार्ग पर दबाव कम होगा।
हालांकि, इन परियोजनाओं के निर्माण में जमीन अधिग्रहण और बजट जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बिहार में रेलवे विकास को प्राथमिकता दे रही हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में कई नई रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।
फिलहाल, नई रेल लाइनों को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। खासकर नालंदा और बोधगया क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि इससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी। बिहार में रेलवे विस्तार की यह पहल आने वाले वर्षों में राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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