बिहार में पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, सुधा दूध और पनीर के दाम भी बढ़े

बिहार में पेट्रोल-डीजल और सुधा दूध के बढ़े दाम को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर
बिहार में पेट्रोल-डीजल और सुधा दूध के बढ़े दाम को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर

पटना: बिहार में आम लोगों पर महंगाई की एक और बड़ी मार पड़ी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही सुधा दूध और उससे जुड़े कई उत्पाद भी महंगे होने जा रहे हैं। लगातार बढ़ रही महंगाई से अब रसोई से लेकर सफर तक का खर्च बढ़ने वाला है।

तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें शुक्रवार रात से लागू हो गई हैं। राजधानी पटना में अब पेट्रोल की कीमत 110.16 रुपए से बढ़कर 111.11 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 96.19 रुपए से बढ़कर 97.14 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है।

महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले भी मंगलवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की थी। लगातार बढ़ते ईंधन के दामों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

इधर बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड यानी COMFED ने भी सुधा दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमत बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। नई दरें 25 मई 2026 से पूरे बिहार में लागू होंगी। फेडरेशन के अनुसार पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत बढ़ने, पैकेजिंग खर्च, पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई, बिजली और परिवहन लागत बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया है।

बिहार में पेट्रोल-डीजल और सुधा दूध के बढ़े दाम
बिहार में पेट्रोल-डीजल और सुधा दूध के बढ़े दाम

COMFED के मुताबिक दूध की खरीद कीमत में 2 रुपए से लेकर 3.13 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ेगा। रोजाना दूध का इस्तेमाल करने वाले परिवारों के खर्च में अब और बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा सुधा के पनीर, बटर, पेड़ा, रसगुल्ला और गुलाबजामुन जैसे उत्पाद भी महंगे हो जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से सिर्फ पेट्रोल-डीजल का खर्च ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि इसका असर दूसरे जरूरी सामानों पर भी दिखाई देगा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन भी महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी संभव है।

खेती-किसानी पर भी इसका असर पड़ सकता है। ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और कृषि उपकरणों के संचालन में किसानों का खर्च बढ़ेगा, जिससे अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को मुख्य वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। युद्ध से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण कीमतों में संशोधन करना पड़ा है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं।

दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के VAT के आधार पर ईंधन की अंतिम कीमत तय होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग होती हैं।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से पेट्रोलियम उत्पादों का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए, ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके।

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