संजय सरावगी की नई टीम में सम्राट चौधरी के करीबी बाहर, बीजेपी संगठन में फिर बढ़ा सवर्ण और वैश्य दबदबा

बिहार बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति में संजय सरावगी की टीम का gishns
बिहार बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति में संजय सरावगी की टीम का घोषणा

पटना: बिहार बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान सिर्फ संगठन विस्तार नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक रणनीति का खुला संकेत माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के करीब छह महीने बाद संजय सरावगी ने अपनी टीम घोषित की और इस टीम ने पार्टी के भीतर कई तरह की चर्चाओं को हवा दे दी है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि नई टीम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के करीबी माने जाने वाले कई चेहरे बाहर कर दिए गए हैं। संगठन के गलियारों में इसे “साइलेंट क्लीनअप” की तरह देखा जा रहा है।

इस बार प्रदेश कार्यसमिति की संख्या 35 से बढ़ाकर 38 की गई है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि पुराने चेहरों में सिर्फ 10 को रिपीट किया गया। बाकी लगभग 25 से ज्यादा नए चेहरे संगठन में लाए गए हैं। जिन लोगों को रखा गया है, उनमें भी कई का प्रमोशन और कुछ का डिमोशन हुआ है।

नई टीम का जातीय समीकरण भी चर्चा में है। बीजेपी ने एक बार फिर अपने पारंपरिक अगड़ा वोट बैंक को मजबूत रखने का संकेत दिया है। 38 सदस्यीय टीम में 18 सवर्ण नेताओं को जगह मिली है। इनमें सबसे ज्यादा 7 भूमिहार हैं। इसके अलावा 6 राजपूत, 4 ब्राह्मण और 1 कायस्थ चेहरा शामिल किया गया है।

संगठन में वैश्य समाज की हिस्सेदारी भी इस बार बढ़ाई गई है। संजय सरावगी खुद वैश्य समाज से आते हैं और उनकी टीम में 5 वैश्य नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी के भीतर इसे कोर वोट बैंक को साधने की रणनीति माना जा रहा है।

हालांकि पार्टी ने पिछड़ों की हिस्सेदारी पूरी तरह कम नहीं की है। नई टीम में 8 ओबीसी और 8 ईबीसी नेताओं को जगह मिली है। ओबीसी वर्ग से कुर्मी, कुशवाहा और यादव नेताओं को भी शामिल किया गया है। बीजेपी गैर-यादव पिछड़ा समीकरण को बरकरार रखना चाहती है, इसका असर इस चयन में साफ दिख रहा है।

सबसे बड़ा बदलाव प्रदेश महामंत्री पद पर हुआ है। पहले के लगभग सभी प्रभावशाली चेहरे बाहर कर दिए गए। राजेश वर्मा, शिवेश राम, राधामोहन शर्मा और लाजवंती झा जैसे नेताओं की छुट्टी कर दी गई।

उनकी जगह सरोज रंजन पटेल, धनराज शर्मा, प्रीति शेखर, नितिन अभिषेक और राजेश उर्फ राजू झा जैसे नए चेहरों को मौका मिला है। संगठन के भीतर लंबे समय से काम करने वालों को ऊपर लाने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।

भागलपुर की पूर्व डिप्टी मेयर प्रीति शेखर को प्रदेश महामंत्री बनाना भी पार्टी का बड़ा प्रयोग माना जा रहा है। बीजेपी में उनकी पहचान तेज-तर्रार प्रवक्ता और जमीन पर एक्टिव महिला चेहरे की रही है।

इधर, प्रदेश उपाध्यक्षों की सूची भी राजनीतिक संदेश से भरी हुई है। हरिभूषण ठाकुर बचौल, पवन जायसवाल और प्रणव कुमार यादव जैसे पूर्व विधायकों को उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं अनिल ठाकुर, नंद लाल चौहान और संतोष रंजन राय को प्रदेश मंत्री से प्रमोट कर उपाध्यक्ष बना दिया गया।

सम्राट चौधरी खेमे के कई नेताओं का बाहर होना सबसे ज्यादा चर्चा में है। संजय खांडेलिया, सिद्धार्थ शंभू, रत्नेश कुशवाहा और ललिता कुशवाहा जैसे नेताओं को नई टीम में जगह नहीं मिली। पार्टी के भीतर इसे साफ संकेत माना जा रहा है कि संगठन की कमान अब पूरी तरह संजय सरावगी के हाथ में रहेगी।

बीजेपी के अंदर यह चर्चा भी तेज है कि अब सम्राट चौधरी सरकार पर फोकस करेंगे और संगठन की दिशा सरावगी तय करेंगे। अब तक पार्टी में यह धारणा थी कि सम्राट सरकार और संगठन दोनों में प्रभाव बनाए रखेंगे, लेकिन नई टीम के बाद तस्वीर कुछ अलग दिख रही है।

नई टीम में युवाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश भी साफ नजर आती है। बीजेपी अगले चार साल तक बड़े चुनावी दबाव से बाहर है। ऐसे में संगठन नए चेहरों को तैयार करने पर जोर दे रहा है। प्रदेश स्तर के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इस बार “काम करने वालों” को प्राथमिकता मिली है, सिर्फ बड़े नामों को नहीं।

प्रदेश महामंत्री बनाए गए धनराज शर्मा पहले गया में दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं सरोज रंजन पटेल और राजेश उर्फ राजू झा मंडल स्तर से संगठन में ऊपर आए हैं। पार्टी इन्हें भविष्य की लीडरशिप के तौर पर तैयार करना चाहती है।

महिलाओं की भागीदारी भी इस बार बढ़ाई गई है। 38 सदस्यीय टीम में 9 महिलाओं को जगह मिली है। यानी करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं को दी गई है।

कटिहार के प्राणपुर से दो बार विधायक रहीं निशा सिंह को महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के भीतर उन्हें आक्रामक और एक्टिव महिला चेहरा माना जाता है। वहीं अनुसूचित जाति मोर्चा की जिम्मेदारी विधायक सुजीत पासवान को दी गई है।

प्रदेश उपाध्यक्षों की सूची में भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, ओबीसी, ईबीसी और दलित वर्ग का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हरिभूषण ठाकुर बचौल, राकेश कुमार, मनोज कुमार सिंह, अनामिका पासवान, शोभा सिंह, पवन जायसवाल, प्रणव यादव, संतोष रंजन राय, नंद लाल चौहान और अनिल ठाकुर जैसे नेताओं को अलग-अलग सामाजिक समीकरण के हिसाब से जिम्मेदारी दी गई है।

प्रदेश महामंत्रियों में सरोज रंजन पटेल, धनराज शर्मा, प्रीति शेखर, नितिन अभिषेक और राजेश उर्फ राजू झा को शामिल किया गया है। वहीं प्रदेश मंत्रियों की सूची में सुभाष साहू, जनेजय कुमार सिंह, रागिनी रानी, कुमार राघवेंद्र, प्रभाकर मिश्रा, अंजनी निषाद, मनोज चौधरी, मुकेश सिंह कुशवाहा, सीमा झा, सरला रजक, सुनील राम, संजय कुमार मुन्ना और मुकेश शर्मा जैसे चेहरे शामिल हैं।

कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह को दी गई है। सह-कोषाध्यक्ष के तौर पर राजेश सिन्हा और अंकुर गुप्ता को जिम्मेदारी मिली है।

मोर्चा अध्यक्षों की सूची में भी जातीय और राजनीतिक संतुलन दिखाने की कोशिश हुई है। युवा मोर्चा की कमान जितेंद्र सिंह, महिला मोर्चा की निशा सिंह, किसान मोर्चा की राम सुमिरन सिंह, ओबीसी मोर्चा की प्रमोद चंद्रवंशी, अनुसूचित जाति मोर्चा की सुजीत पासवान और अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान मो. महबूब हक को दी गई है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीजेपी ने इस नई टीम के जरिए दो साफ संदेश दिए हैं। पहला, संगठन में अब प्रदेश अध्यक्ष की पसंद और पकड़ सबसे ऊपर रहेगी। दूसरा, पार्टी अपने कोर अगड़ा वोट बैंक को साधे रखते हुए गैर-यादव पिछड़ों और युवा चेहरों के साथ नया सामाजिक संतुलन तैयार करना चाहती है।

फिलहाल बीजेपी के अंदर नई टीम को लेकर चर्चा गर्म है। कई पुराने नेता असहज बताए जा रहे हैं, जबकि नए चेहरों में उत्साह दिख रहा है। आने वाले दिनों में यही टीम बिहार बीजेपी की राजनीतिक दिशा तय करेगी।

इसे भी पढ़ें: 

आनंद मोहन बोले- UGC पर ललन सिंह और संजय झा चुप क्यों? नितिन नवीन भी सवर्ण, फिर भी नहीं बोलते

Leave a Comment

और पढ़ें